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काय सांगू माझ्या बद्दल मलाच काही कळत नाही बोलायच खुप असत मला पण बोलणं मात्र जमत नाही.अजुनही बोथट झाली नाही धार शीवबाच्या तलवारीची, कुणाचीही हीम्म्त नाही "मराठीला" संपवण्याची, घासल्याशीवाय धार नाही तलवारीच्या पातीला, आणी "मराठी" शीवाय पर्याय नाही महाराष्ट्राच्या मातीला !
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